गरीबो की ओकात ना पूंछो तो अच्छा है |

*गरीबो की ओकात ना पूंछो तो अच्छा है :-

गरीबो की ओकात ना पूंछो तो अच्छा है |




गरीबो की ओकात ना पूंछो तो अच्छा है, (2)
इनकी कोई जात न पूंछो तो अच्छा है !
चहरे कई बेनकाब हो जायेंगे ऐसी कोई बात 
ना पूंछो तो अच्छा है !
में खुल के हंस तो रहा हु, फ़क़ीर होते हुए, 
वो तो मुस्कुरा भी न पाया अमीर होते हुए !
वो जिनके हाथो में हर वक्त छाले रहते है (2)
आबाद उन्ही के दम पर ये महल वाले रहते है !
गरीबो के बच्चे भी खाना खा सके त्योहारों में (2)
इसलिए भगवान खुद बिक जाते है बाजारों में !
सुला दिया माँ ने भूखे बच्चों को ये कहकर (2)
परियां आएंगी सपनो में रोटियां लेकर, 
पेट के भूख ने जिंदगी के हर रंग दिखा दिए (2), 
जो अपना बोझ उठा न पाए, 
पेट की भूख ने पत्थर उठवा दिए !
उन घरों में जहाँ मिट्टी के घड़े रहते है (2), 
कद में छोटे हो मगर लोग बड़े रहते है !
बुरा हो वक्त तो सब आजमाने लगते है(2), 
बड़ो को भी छोटे भी आंखे देखने लगते है !
नए अमीरों के घर भूलकर भी मत जाना, 
हर एक चीज की कीमत बताने लगते है !
कभी आंसू तो कभी खुशी बेचीं (2)
हम गरीबो ने तो अपनी बेकसी बेचीं, 
चंद सांसे खरीदने के लिए, 
रोज थोड़ी सी जिंदगी बेचीं !
तहजीब की मिसाल तो गरीबो के घर पे है (2)
दुपट्टा फटा हो तो क्या हुआ मगर उनके सर पे है !


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