मुस्कुराते रहो मेरे दोस्त सब ठीक नहीं है पर सब ठीक हो जायगा|

*मुस्कुराते रहो मेरे दोस्त सब ठीक नहीं है पर सब ठीक हो जायगा:-

मुस्कुराते रहो मेरे दोस्त सब ठीक नहीं है पर सब ठीक हो जायगा|




             गमो की रात परेशानी वाली शाम 
      मुश्किलों से भरी ये दोपहर और तक़लीफो का 
       हर सैलाब चला जायगा, मुस्कुराते रहो मेरे दोस्त 
       सब ठीक नहीं है, पर सब ठीक हो जाएगा |
       मुझे नहीं पता की तुम्हारी परेशानी खड़ी है किस 
       तकाजे पर में जो कुछ कहूंगा वो सब होगा सिर्फ 
       मेरे अंदाजो पर बस इतना जान लो की तुम्हारे चेहरे 
             से तुम्हारे हालात अब बयां हो रहे है !
       तुम्हे देखकर तुम्हारे दोस्त भी अब परेशान हो 
      रहे है ! तुम्हारी परेशानी के कई सबब होंगे 
      में मानता हूँ की तुम्हारे जिंदगी में भी मुश्किलों 
      के कई रब होंगे, अरे तो क्या हुआ (2)!
      अपने जिंदगी से खूबसूरती का ये बसर जाने मत दो !
       अपने चेहरे से मुस्कुराहट का असर जाने मत दो !
      दुनिया में उम्मीद जितना कभी कुछ रहा ही नहीं, 
       तुम क्यों नहीं समझ रहे हो जो तुम्हारा हुआ नहीं 
       असल में कभी तुम्हारा था ही नहीं !
       मुझे पता है  (2), तुम्हे उसकी बाते याद आती होंगी 
       देर शाम की वो मुलाकाते जरूर सताती होंगी !
      उसके दिए हुए तोहफों को जब भी अकेले में देखते होंगे,
      मुझे पता है मेरे दोस्त तुम ये जरूर सोचते होंगे, 
      की मेरी क्या गलती थी !की  मुझसा  इश्क उसे 
      और किसी से हुआ होगा जहाँ सिर्फ मेरी उंगलियों के 
      निशान थे, वहाँ जाने कितनो ने छुआ होगा !
     अरे तुम क्यों नहीं समझते कितनी इश्क कितनी परवाह, 
      इतनी मुक़्क़मल रातो के बावजूद जो तुम्हारा नहीं 
      हुआ वो किसी और का भी नहीं हुआ होगा !
      खेर छोड़ो ये सब बस इतना जान लो की समझदारी 
      की हर बड़ी उम्मीद तुमसे एक छोटी नादानी चाहती है !
      कामयाबी अक्सर कुछ रिस्तो की क़ुरबानी चाहती है !
      तुम समझदार भी थे, तुमने नादानी भी कर दी, 
      तुम कामयाब जरूर होंगे मेरे दोस्त तुमने क़ुरबानी 
      भी कर दी ! बड़े रिश्ते और भी है जिंदगी के पैमाने 
      पर भाव ठीक से लगाना आजकल खुशियाँ बिकने
      लगी है दुकानों पर, और खुद उठ जाओ मेरे दोस्त 
      अभी बहुतो को उठाना है, जो लोग तुम्हारा इंतजार 
              कर रहे है उन्हें गले से लगाना है !
   अरे कुछ नहीं बदला यार जरा इधर -उधर जा कर तो देखो, 
     पापा याद कर रहे है एकबार घर जा कर तो देखो !
      इश्क में तो  लोग ख़ुश हो जाते है (2)!
     तुम परेशान क्यों हो गए मिलना बिछड़ना तो रिवाज़ है, 
   यहां का तुम हैरान क्यों हो गए !
     अरे क्या हुआ अगर वो चली गई (2)...!
    तुम उदास क्यों हो दुनिया बहुत बड़ी है मेरी जान 
    तुम हताश क्यों हो, सारी परेशानीयों का हल 
    यु ही निकल जायगा एक बार घर जाओ माँ को 
      गले से लगाओ दुनिया को देखने का नज़रिया ही 
    बदल जायगा ! फ़िक्र इतनी सी है ना तुम्हारी (2)...!
    की तुम्हारी पहचान और उसका नाम एक हो गए थे, 
    कुछ देर के लिए ! तुम्हारी पहचान से उसका नाम 
  धीरे -धीरे अलग हो जायगा और हमेशा मुस्कुराते रहो 
   मेरे दोस्त सब ठीक नहीं है लेकिन जल्दी ही सब 
      ठीक हो जायगा...... !!!!

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