अक्सर उसका मासूम सा चेहरा याद आता है !

*अक्सर उसका मासूम सा चेहरा याद आता है :-

अक्सर उसका मासूम सा चेहरा याद आता है !



अक्सर उसका मासूम सा चेहरा याद आता है (2)!
जब वो घर छोड़ कर चला जाता है !
कितना अजीब रिवाज़ इस दुनियां ने बनाया (2), 
बेटी हो बिदा तो दर्द सबसे अपना सुनाती है !
लेकिन जब एक बेटा घर से दूर चला जाता है (2), 
तो उसका दर्द उसके अलावा कोई नहीं सुन पाता है !
तब जाकर उसका मासूम सब चेहरा याद आता है !
क्यों बड़े होते -होते मज़बूरीयां कुछ ऐसी बन जाती है, 
कभी पढ़ाई, कभी नौकरी घर से दूर जाने की मज़बूरी बन जाती है !
जिंदगी भी इनको किस अजीब मोड़ पे ले आती है, 
आँखों में आंसू लेकर भी मुस्कुराते हुए सारा दर्द पी लेते है !
न चाहते हुए भी इनको सब से दूर जाना पड़ता है, 
और इतना सब होने के वावजूद उसका भोला सा मन, 
सबकुछ चुपचाप सह जाता है !
तब जाकर उसका मासूम सा चेहरा याद आता है !
घर पर ज़ब भी कोई पूछे की... !
क्या याद हमारी आती है??? 
उन्हें किस मुँह से बताए की याद उनकी कितनी तड़पाती है !
वो छोटी -छोटी बातें जो अक्सर घर की याद दिलाती है, 
तब उसका मुस्कुराहट उसका दर्द सब से छुपता है !
तब उस मुस्कान के पीछे छुपे मासूम से चेहरे की याद बहुत सताती है !
घर मे लाडले जो हुआ करता था सब का, 
जिनके ख्वाहिसे  सबसे पहले पूरा किया जाता था !
उन्हें न हो किसी तरह की तकलीफ इसका घर, 
में पूरा धयान रखा जाता था !
लेकिन आज उनको जमीन पर सोया देख दिल टूट सा जाता है !
तब फिर उसका मासूम सा चेहरा मुझे याद आता है !
सब पर हुक्म फरमाने वाले आज कैसे भी रह जाते है, 
सब को हमेशा सुनाने वाले आज गुमसुम सा सो जाते है !
सही मायने में आज वो परिवार के अहमियत समझ पाते है, 
जब वो अकेले जिंदगी की दौड़ मे कही दूर निकल जाते है !
साथ उनका दूर तक फिर भी परिवार निभाता है, 
क्योंकि उनको उसका मासूम सा चेहरा फिर याद आ जाता है, 
जब वो घर छोड़ कर चला जाता है !

हा तो दोस्तों आपको ये सायरी कैसी लगी हमको जरूर बताए, और अगर ये सायरी आपलोगो को पसंद आयी तो इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करें.... !!!
धन्यवाद !

Post a Comment

0 Comments