कुछ बातें ऐसी होती है ,मत पूछो कैसी होतीं हैं।

 *कुछ बातें ऐसी होती है ,मत पूछो कैसी होतीं हैं:-

अपने ही हाथो से अपनी मय्यत सजा ली हमने ,
हाँ भाई इश्क़ करने की सज़ा पा ली हमने। 
और माँ -बाप सही कहते थे यार दूर रहो प्यार से ,
करीब रहकर भी कौन -सी वफ़ा पा ली हमने!


कुछ बातें ऐसी होती है ,मत पूछो कैसी होतीं हैं।




 
 

कुछ दिन वो मेरे साथ रही ,
फिर दिन बदला वो चली गई। 
अब भी करते है याद उसे ,
जब हसने की चाहत होती है। 
कुछ बातें ऐसी होती है ,
मत पूछो कैसी होती है। 
न रंज है न है गिला हम खुश है यार हमको वो दो पल मिला ,
मिल जाए किसी मोड़ पे वो फिर हमको हसरत ये अक्सर होती है। 
कुछ बातें ऐसी होती है ,
मत पूछो कैसी होती है। 
अब वो साथ नहीं और साथ भी है ,
उसकी सब बातें याद भी है ,
तुम आशिक हो यार ना मानोगे ,
कुछ वफ़ाए ऐसे भी होती है। 
और हाँ कुछ बातें ऐसी होती है ,
मत पूछो कैसी होती है। 

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