सिकस्त मिली है हरबार जिंदगी से हारा हुआ हूँ पहले से , बस ले जाकर दफना दो जिस्म को मेरे , मारा हुआ हूँ पहले से।

 *सिकस्त मिली है हरबार जिंदगी से हारा हुआ हूँ पहले से , बस ले जाकर दफना दो जिस्म को मेरे , मारा हुआ हूँ पहले से:-

सिकस्त मिली है हरबार जिंदगी से हारा हुआ हूँ पहले से , बस ले जाकर दफना दो जिस्म को मेरे , मारा हुआ हूँ पहले से।
सिकस्त मिली है हरबार जिंदगी से हारा हुआ हूँ पहले से , बस ले जाकर दफना दो जिस्म को मेरे , मारा हुआ हूँ पहले से। 




सिकस्त मिली है हरबार जिंदगी से हारा हुआ हूँ पहले से ,
 बस ले जाकर दफना दो जिस्म को मेरे , मारा हुआ हूँ पहले से। 
मेरा छोटा सा आसयाना वो बेहरहमी से उजाड़ती गयी ,
पर नाराजगी जताना फितरत में नहीं मेरे ,
इसीलिए शिकायतो को कागजों में लिखकर एक के बाद एक फाड़ता गया। 
ना तो तेरी बाहों में सो पाता था ,
न रातो की बाहों में नींद आती है। 
पहले तेरी बातों में खो जाता था ,
और तो अब रातो की बातों में रो जाता हूँ। 
और सिकस्त मिली है हरबार जिंदगी से हारा हुआ हूँ पहले से ,
 बस ले जाकर दफना दो जिस्म को मेरे , मारा हुआ हूँ पहले से। 
कितना महसूस करता हूँ तुम्हे खुद में ,
रोम -रोम बस तुम्हारा नाम ले -लेकर तड़पता है ,
और अब तो जमाना भी बदला -बदला सा लगने लगा है हमे ,
अब कैसे बताऊ तुम्हे की सीना मेरा है पर दिल तुम्हारा ही धड़कता है। 
मुझे छोड़े तुम्हे एक अरसा हो गया है ,
इस बड़ी सी दुनियां में कहि खो गयी हों तुम ,
आज बारिश कि एक  प्यारी सी बूंद ने कान में चुपके से कहा मेरे ,
की घर में छिपकर आज फिर रो गयी हो तुम। 
तू क्या गयी मेरी जिंदगी से हमने खुद को थका दिया आंसुओ को पोछते -पोछते ,
बहुत ही हसीन पलों के लिए कुछ खुशी के आँसू बचा के रखे थे इन आँखों में ,
अब तो उन्हें भी बहा दिया तुझी को सोचते -सोचते। 
और सिकस्त मिली है हरबार जिंदगी से हारा हुआ हूँ पहले से ,
 बस ले जाकर दफना दो जिस्म को मेरे , मारा हुआ हूँ पहले से। 

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