मुझे कोख में ही मार देना माँ....!

 मुझे कोख में ही मार देना माँ:-

मुझे कोख में ही मार देना माँ....!


मुझसे नहीं सही जायगी वो गन्दी नजरे ,
और वो गंदे नजरिये से छूने वाले वो हाथ ,
मुझसे नहीं सही जायेंगे वो अपने और हर बात पर ,
रोक-टोक करने वाला अपनों का साथ,
खंजर मेरे सीने में उतार देना माँ ,
मुझे कोख में ही मार देना माँ...!
मुझसे नहीं छोड़ा जायगा शादी के वक्त घर अपना न पराया हुआ जायगा ,
मुझे खुद ही से घिन आने लगेगी माँ जब कभी भी मुझे छुआ जायगा। 
मुझसे नहीं सुनी जाएँगी वो बातें ज़माने की ,
क्या जरुरत पड़ी थी ऐसी कपड़े पहन कर जाने की ,
तुम्हारी इज्जत का ख्याल नहीं तो कम-से-कम हमारी इज्जत की परवाह की होती ,
बाबा में तो बुर्का तक पहन लेती अगर में  बेटी दरगाह की होती। 
मेरे हिस्से का प्यार भी मेरे भाई पर वार देना माँ ,
मुझे कोख में ही मार देना माँ....!
सुना है हमे बच्चे  पैदा करने की मशीन कहा जाता है ,
बदनाम ,बदसलूकी ,बदचलन तो कभी रंगीन कहा जाता है। 
ऊँगली उठा दी जाती है बिना कुछ सोचे -समझे हमपर ,
मर्द कहते हो न तुम खुद को शर्म करो कुदरत भी हसता होगा तुमपर। 
मुझसे नहीं छुपाएँ जायेंगे आंसू अपने उस रसोई घर में ,
नहीं सोचा जायगा कितना अच्छा होता , होती लड़का अगर में ,
बस झूठी इज्जत के लिए की खातिर मुझे किताबो से दूर किया जायगा ,
और खेर ये सब तो इसलिए न पढ़ -लिख लिया अगर ,
थोड़ा भी  मुझमे गुरुर जो आ जायगा। 
और सुनो जित गया जमाना मेरे आगे अब तुम मुझे हार देना माँ ,
और मुझे कोख में ही मार देना माँ....!
कब-तक यु दुसरो के ख़ुशी के लिए जियेंगी ये लड़कियां ,
कब-तक तुम्हे जिन्दा रखने के लिए रोज जहर पियेंगी ये लड़कियाँ। 
अब वक्त आ गया है इन चीखो का दहाड़ में बदलने का ,
नहीं तो पता नहीं कब तक अपने होठ यूं ही सियेंगी ये लड़कियाँ। 
दूसरे की ख़ुशी से रिस्ता बाद में बनाना ,
अब अपनी रूह से जुड़ के दिखा दो और सिर्फ ,
पापा की परी बोलने से काम नहीं चलने वाला ,
अब वक्त आ गया है थोड़ा उड़ा के दिखा दो ,
चला दो ऐसी जादू की छड़ी ज़माने पर ,
जैसे तीर लगे सीधे जा के निशाने पर। 
हम लड़कियों के लिए भी दरगाह में धागे बंधे जाए ,
मुबारक हो बेटी हुई है सुनकर रिस्तेदार  भी दौड़े चले आए। 
तब समझना मेरे आने का वक्त हो गया है ,
बुहुत से रिश्ते निभाने का वक्त हो गया है ,
उस वक्त मुझे अपनी गोद से उतार देना माँ ,
और अगर ऐसा ना हुआ ना तो मुझे कोख में ही मार देना माँ....!

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