न जाने मोहब्बत के बिच ये जात क्यों आती है ?

*न जाने मोहब्बत के बिच ये जात क्यों आती है :-

न जाने मोहब्बत के बिच ये जात क्यों आती है ?




दिन क्यों ढलता है ये रात क्यों आती है ?
 मेरी जुबान पर उसकी बात क्यों आती है ?
और बात प्यार ,मोहब्बत, शादी तक हो तो सही भी है ,
न जाने मोहब्बत के बिच ये जात क्यों आती है ?
मुझे हौसला चाहिए कोई दे सकता है क्या ?
उसके और मेरे बिच फैसला चाहिए कोई दे सकता है क्या ?
और जिसमे उसका गुजरा हो सके ऐसा घर तो नहीं बना पाया आज तलक ,
अब एक छोटा सा घोषला चाहिए कोई दे सकता है क्या ?
अब तो ज़माने के ताने पसंद आने लगे है ,
सारे दर्द भरे गाने पसंद आने लगे है ,
और नए रिश्तों को तो आजमा के देख लिया हमने ,
अब कुछ लोग पुराने पसंद आने लगे है। 
टुटा हुआ तारा हूँ में, बिन सैलाब का किनारा हूँ में ,
और उसकी गली में गया था एक-दो दफा तब से लोगो के नजरों आवारा हु में। 
मेरी यादों से अबतक वो गया ही नहीं ,
उसकी आँखों में जहां तो दिखता है बस एक हया ही नहीं ,
और बेवफाई उसकी बताने बेठू तो जिंदगी बीत जायगी ,
अब उसकी कहानी मेरी लफ्जों में बयां ही नहीं। 
अरे जाने दो उसे जो सक्स हमारा नहीं ,
किसने कहा उसके बिना गुजारा नहीं ,
और आखरी दफ़ा आवाज दे रहे है ,
मुड़ के देखना न देखना मर्जी है तुम्हारी ,
फिर मत कहना तुमने पुकारा नहीं। 
और यादें जहन से न जाय पिया ,नैना लड़ाए पछताए पिया ,
और फेरे हो गए जब गैर संग हमारे तब तुम आये तो क्या आए पिया। 


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