में तुम्हे पहचानने से इंकार कर दूंगा।

 *में तुम्हे पहचानने से इंकार कर दूंगा:-

में तुम्हे पहचानने से इंकार कर दूंगा।


किसी रोज वक्त लेकर तुम मुझसे मिलने आओगी ,
मुझको अपना बहुत खास बनाओगी। 
जामने को देखाओगी मेरे साथ खुद की तस्वीर तुम ,
मुझसे मिलने की कई बहाने बनाओगी। 
चलो दुबारा चली आना मेरी जिंदगी में ,
जब ये अंधेरा छोड़ में चला जाऊ रोशनी में ,
मगर इरादें जरा मजबूत कर के आना ,
क्योकि इस बार अहमियत में तुम्हे थोड़ी काम दूंगा ,
हाँ अपने वक्त के हिसाब से में भी खुद को बदल दूंगा। 
और लूंगा एक-एक पल का हिसाब ,
तुम्हे पता है न शायर हूँ में ?
कोई जलती गजल तुम्हारे नाम कर दूंगा ,
और भरी महफ़िल में तुम्हे नीलाम कर दूंगा ,
हाँ में तुम्हे पहचानने से इंकार कर दूंगा। 
मुझे मेरी दुनियाँ में खुश देखकर तुम्हारी धड़कने थम जायगी ,
और जब तुम्हे पता चलेगी इस खुशी की वजह कोई और है ,
तब मेरी जान............!
तुम्हारी जान पे बन आएगी। 
जब बैठोगी तन्हा रातों में ,
याद करोगी वो अल्फाज जो मेने तुम्हारे लिए लेखें थे ,
किस तरह तुम उन्हें अपना बताकर किसी और को सुना दिया करती थी। 
वो मोहब्बत जो तुमने मुझसे सीखी थी ,
किस तरह किसी और पर लुटा दिया करती थी। 
साथ बिताए सभी पलों को गिनवाकर तुम माफ़ी भी मांगोगी ,
मगर में उस लम्हे को नजरअंदाज कर दूंगा ,
और हाँ मेरी जान में तुम्हे पहचानने से इंकार कर दूंगा। 
तुमसे दूर होने से लेकर खुद में खोने तक का सफर बहुत मुश्किल होगी ,
लेकिन यकीन मनो वो मंजिलें बहुत खूबसूरत होगी ,
खूबसूरत होगा वो दिन , खूबसूरत होगी वो रात ,
जो तुम्हारी यादों के बगैर गुजरेगी। 
अब तुम अपने रस्ते जाओ और मुझे भटक जाने दो ,
अब संभलने से डर लगता है , थोड़ा सा ठोकर खाने दो। 
अभी तो जमा करना है मुझे एक-एक सुनने वाला ,
मेरे चाहने वालों की भीड़ लग जाने दो ,
जब भीड़ लगेगी हजारों की तब में ढूंढूंगा उस एक चेहरे को ,
तब तुम्हे अपने पास बुलाकर थोड़ा खास बताकर बहुत आम कर दूंगा ,
और है मेरी जान में तुम्हे पहचानने से इंकार कर दूंगा। 

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