आज फिर मोहल्ले में किसी को प्यार हुआ है चलो तमासा देखते है

 *आज फिर मोहल्ले में किसी को प्यार हुआ है चलो तमासा देखते है:-

आज फिर मोहल्ले में किसी को प्यार हुआ है चलो तमासा देखते है।


आज मोहल्ले में हादसा सा हुआ ,
किसी को पहला प्यार सा हुआ ,
आसमान में कुछ रंग सा उड़ा नफरत की साजिसों में कुछ भंग सा पड़ा ,
में वहां था कुछ दंग सा खड़ा क्योकि मुझे खबर थी ,
की मुक्कदर को इस रिश्ते से नाराजी थी। 
वो लड़का भक्त था भोलेनाथ का और वो लड़की पाँच वक्त नमाज़ी थी। 
की उनका बिछड़ना तय था क्योकि मजहब सारे प्यार करो और प्यार से रहो सिखाते रहे ,
और लोग उसी मजहब के नाम पर प्यार की कलियाँ जलाते रहे। 
मान गए जमाना तुझे तू दिल तोड़ने में बड़ा पेशेवार है ,
निकल कर देखो कभी गली में हर मोड़ पे एक मोहब्बत की कब्र है। 
की अपने प्यार को बिखरता हुआ देखने वाले ,
उन नौजवानों की आँखों में चलो निराशा देखते है ,
आज फिर मोहल्ले में किसी को प्यार हुआ है चलो तमासा देखते है। 
जब में छोटा था शायद थोड़ा खोटा था ,
की सोचता था प्यार अहसास है जो है साजन से सईयां तक ,
बहन से भईया तक , बालक से मैया तक ,
और पापा की चिंता भरी मार से लेकर COLLEGE वाले यार तक ,
प्यार वो धागा है जिंदगी की मोती माला में ,
प्यार तो कही भी हो सकता है हो वो मन्दिर ,मस्जिद ,मय्यत ,महफ़िल या मधुशाला में ,
सोचता था बचपन में की प्यार के वादें अमर होते है। 
बड़ा हुआ तो समझा जनाब ये तो INSTA BIO में नाम लिखने से नाम हटाने तक का सफर है ,
ये बातें सारी फिजूल की है , ये बातें सारी नाम की है ,
बैठो-बैठो कोन सी काटू यहाँ रसीदें हर दाम की है। 
कोई बाईक दिखा कर खरीदता है ,तो कोई अदा दिखा कर ,
कोई इस जुए में दोस्त खोकर टिकता है ,
तो कोई अपना स्वाभिमान लुटाकर। 
आओ इस POEM में प्यार की मॉर्डन  परिभाषा देखते है ,
आज फिर मोहल्ले में किसी को प्यार हुआ है चलो तमासा देखते है। 
अब में समझ चूका हूँ की सच्चे प्यार की वो किस्से-कहानियां ,
आज बस शायरों का सोख बनकर रह गए है ,
लैला-मजनू , हीर-राँझा जो कभी मिसाल हुआ करते थे,
आज बस TIK-TOK बनकर रह गए है। 
जो लड़कियां सात जन्मों का वादा करती है ,
बस सात हफ्ते में छोड़ जाती है। 
अगर पहले ही मालूम था की प्यार में भेद है ,
और पापा को खेद है फिर क्यों हाँ करके दिल तोड़ देती हो ?
और यहाँ लड़के भी कम नहीं है इस खेल में ,
लड़के यहां हाँ में हाँ मिलाने वाले लड़कियों को जानेमन कहते है ,
और अगर उस लड़की ने इंकार किया तो उसे भरी महफ़िल में बदनाम करते है। 
और सिवानी-सिवानी जपने वाले लड़के ,
एक पल में पलटी खाकर दिल में नताशा लिखते है। 
और हाँ भाई आज फिर मोहल्ले में किसी को प्यार हुआ है ,
  चलो चलकर तमासा देखते है। 



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