जब प्यार बेसुमार है फिर क्यों शादी से इंकार है ?

 *जब प्यार बेसुमार है तो क्यों शादी से इंकार है :-

जब प्यार बेसुमार है फिर क्यों शादी से इंकार है ?


थाम के हाथ तू कहती थी की तुझे प्यार बेसुमार है ,
तो जा न जब प्यार बेसुमार है फिर क्यों शादी से इंकार है। 
वो अल्हड़ आदतें मेरी , वो मेरी नादानियाँ ,
वो सब शरारतें मेरी , वो मेरी मनमानियां ,
वो सीरियस बात पे हसना मेरा वो हसते-हसते रोना मेरा ,
वो बेपनाह प्यार करना मेरा , वो बेवजह का लड़ना मेरा ,
वो बेबाकी से बात करना मेरा , वो बिन मतलब अकड़ना मेरा ,
तू कहती थी इन सब बातों ने तेरा दिल चुरा लिया।
की तू सपने देखती है मेरी रातो में ,
तू कहती थी मेरे बिन न रह पायेगी ,
जो में न मिला तुझे तो तू मर जाएगी। 
तो जा न जब प्यार बेसुमार है फिर क्यों शादी से इंकार है। 
कल तक जो अदाए लुभाती थी तुझे आज उन्ही अदाओं से तुझे इंकार है ,
की तू प्यार तो बहोत करती है मुझसे ,
पर शादी के लिए नहीं लगते तुझे सही मेरे संस्कार है। 
कल तक जिस पागल लड़के को देख अपने दोस्तों के सामने इतराती थी तू ,
ओए जीजू है तेरी बोल उनकी नजरें झुकवाती थी तू। 
क्या आज वही पागल लड़का तेरे घरवालों के नजरों में बेकार है ,
की घर ,रिश्तें ,जिम्मेदारियां नहीं संभाल पाउँगा में ,
क्या शादी के लिए तुझे किसी अमीर लड़के का दरकार है ?
फिर भी में प्यार पे सवाल न उठाऊंगा तेरी ,
क्योकि प्यार अब भी तू करती बेसुमार है ,
तो जा न जब प्यार बेसुमार है फिर क्यों शादी से इंकार है। 
की ये जात-पात , ये कुंडलियों का मिलन ,
ये दुनियादारी क्या हो गया है तुम्हे ?
कलतक तो बेमानी थी ये बातें सारी ,
उस वक्त कुंडलियां न मिलवाई तुमने ,
न माँ-पापा की याद दिलाई तुमने जब मिलने मुझसे आती थी ,
मुझे देख-देख मुस्कुराती थी , वो सपनों की झड़ियाँ लगाती थी। 
मेरे दोस्तों पे इम्प्रेसन जमाती थी ,
बस प्यार-प्यार की रट लगाती थी। 
यार नहीं आता है कुछ तो में सिख जाऊंगा ,
क्या चाहिए तू बोल तो सही में करके दिखाऊंगा। 
यु बहाना न बना , न बहला मुझे ,
यूँ अचानक मेरी कमियां न गिनवा मुझे। 
अरे में तुझे पसंद हूँ तो अपनी पसंद पे एतबार तो कर ,
जित लूंगा में सबका मन एक मौका तो दे ,
अपनी मोहब्बत पर उपकार तो कर। 
अगर प्यार करती है , तो हर चुनौती को स्वीकार कर ,
यु बेकार की बातों से न मोहब्बत को शर्मसार कर। 
जो भर चला है मन तो नजरें मिला और बोल ,
यूँ रीत , रिवाज ,समाज की आड़ में न वॉर कर। 
थाम के हाथ तू कहती थी तुझे प्यार है बेसुमार है ,
तो जा न जब प्यार बेसुमार है फिर क्यों शादी से इंकार है। 

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