ये रात एक नशा है जरा इस नशे को चख कर तो देखो !

 *ये रात एक नशा है जरा इस नशे को चख कर तो देखो:-

ये रात एक नशा है जरा इस नशे को चख कर तो देखो


 सँभालते-संभालते भी बात जुबान से फिसल ही जायगी ,
जरा इसकी खामोशियों को जुबान में रख कर तो देखो।
ये रात एक नशा है जरा इस नशे को चख कर तो देखो।  
बीते वो लम्हे लेकर हाथो में हाथ किसी का लेकर साथ चले थे,
 जब हम साथ किसी का हसते मुस्कुराते जब ये शामें बीत जाती थी। 
एक पल के लिए भी दूर होते तो आँखे भर आती थी ,
वो उसकी गलियों में यु आवारा सा रहना,
एक-एक पल अगर याद ना आ जाए तो कहना। 
उन पलों को याद करके थोड़ा सा मुस्कुरा कर तो देखो ,
ये रात एक नशा है जरा इस नशे को चख कर तो देखो। 
कभी किसी की दस्तक डरा देगी आपको ,
तो हल्की सी आहट में भी संगीत सुनाई देगा ,
जो दीवारें बर्षो से खामोश लगती थी आज उनका भी गीत सुनाई देगा ,
जरा उनकी खामोशियों को सुन कर तो देखो ,
ये रात एक नशा है जरा इस नशे को चख कर तो देखो। 
कभी यूं सीधी लेटकर कमरों की उस छत को देखकर बातों की गहराइयों में जाना ,
तो कभी छत पर लेटकर तारों भरे आसमान को देखकर चाँद में उसका चेहरा पाना ,
तो कभी चाँद को यार बनाया है आपने ?
उस चाँद से कभी यारी निभाई है आपने। 
क्या खुद से ही बातों में सारी रात बिताई है आपने ?
इन तारों को अपना यार बना कर तो देखो ,
ये रात एक नशा है जरा इस नशे को चख कर तो देखो। 
जिस इजहार को बरसो से  रोका हुआ है आपने ,
वो रात के नशे में जुबान से निकल ही जायगा। 
घड़ी की टिक-टिक भी कानो में सितार बन कर उतरेगी ,
एक ख़ामोशी की प्यारी सी चुहिया आपकी सारी नींदे कुतर जाएगी ,
कुछ लोग तो ये भी कहेंगे की आपको ये आदत गलत लग गई ,
लेकिन मेरा मुस्कुराकर बस एक ही जबाब रहेगा की मुझे इस नशे की लत लग गयी। 
और सँभालते-संभालते भी बात जुबान से फिसल ही जायगी ,
जरा इसकी खामोशियों को जुबान में रख कर तो देखो।
ये रात एक नशा है जरा इस नशे को चख कर तो देखो।

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