बहुत मुश्किल होता है ना एक लड़की होना

 *बहुत मुश्किल होता है ना एक लड़की होना:-

बहुत मुश्किल होता है ना एक लड़की होना।


बंद दरवाजों में रो कर खुशियों की खुली खिड़की होना ,
बहुत मुश्किल होता है ना एक लड़की होना। 
आंसू लिए सोच में डूबी माँ यूं ही लेटी होती है ,
बटती नहीं है क्यों मिठाईयां जब घर में बेटी होती है। 
जहां रखोगी ये कदम ये पायल वहाँ छम से बोलेगा ,
बचपन से ही बेड़ियाँ क्यों पापा उसका दिल ये हमसे बोलेगा। 
जल्दी से हो जा बड़ी तुझे पूरा घर देखना है ,
क्या करोगी पढ़कर खाली तुझे तो रोटी सेकना है। 
लड़की बड़ी होती है सपने सुहाने देखती है ,
माँ आँख में काजल माथे बिंदी लगाते देखती है ,
टूट जाते है उसके वो सारे सपने कांच के ,
याद आता है जब रखना है इतना बर्तन मांज के ,
उसके सपनो का हमने कभी पूछा ही नहीं की क्या बनना है ,
पर हाँ याद जरूर दिलाया की अभी खाना बनाना है। 
चंद दहेजों के साथ बाप ने बेटी को बिदा कर दिया ,
कैदखाना में भेज बेटी को सोचते है की उसे रिहा कर दिया। 
पहले ही दिन पति नया नियम बता देता है ,
ये दहलीज़ नहीं लक्ष्मण रेखा है दिखा देता है। 
चार दीवारों में सिमटने लगते है इरादे उसके ,
वो जो कर दिखाने के किये थे जो वादे उसके ,
औरत माँ है , दुर्गा है , लक्ष्मी है , राधा है ,
बिना उसके हर एक मर्द हकीकत में आधा है। 
जब हम नहीं मुकम्मल उनके बिना ,
तो क्यों बराबरी का हक़ है उनसे छीना। 
सब कहते है एक मर्द के कामयाबी के पीछे एक औरत का हाथ है ,
तो क्यों नहीं औरत के कामयाब होने में मर्द देता साथ है ,
कहने को तो मालकिन पर जिम्मेदारियों में सारी जकड़ी होना ,
और सच में यार बहुत मुश्किल होता है न एक लड़की होना। 

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