तुम जानती हो मेरी कमजोरी इसलिए खुश हो....!

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*तुम जानती हो मेरी कमजोरी इसलिए खुश हो:-

तुम जानती हो मेरी कमजोरी इसलिए खुश हो....!


जिंदगी जी रहे है एक दिन मरने के लिए ,
और हर दिन जी रहे जिंदगी जीने के लिए ,
वो तो माँ से किया वादा हर वक्त याद रखता हूँ ,
वरना हजारो वजह है मेरे पास भी पिने के लिए। 
मेरी जिंदगी की शामों का एक सवेरा है ,
में हकीकतों से हारा हु पर मेरे ख्वाबो में वो मेरा है ,
और जिसे है रोशनी की तलब में हु उसके लिए बेमतलब ,
क्योकि मेरा हमदर्द तो अब अँधेरा है। 
और मोहब्बत के मुसाफिर से कभी मिले नहीं तुम ,
अभी तुम सिर्फ आशिकों के इसारो को मिले हो ,
और मोहब्बत के समंदर अभी देखे नहीं तुमने ,
अभी सिर्फ तुम किनारों को मिले हो। 
जो जिंदगी हार गया तुमपर उसे कब मिले ,
तुम तो जगह-जगह दिल हारने वालों से मिले हो। 
तन्हाई में जो बेठू कभी या खुद से मिलता हुँ या खुदा से मिलता हूँ ,
सारी रात अपनी सपनो में ही सफर करता हुँ ,
तब कहि जाकर एक सुबह से मिल पाता हु। 
और ये दुनियां को नहीं मेरे दर्द का अहसास मेरे दोस्त ,
में जिससे भी मिलता हूँ मुस्कुरा के मिलता हूँ ,
में मिल जाऊ तुम्हे तुम इसकी दुआ कर रहे हो ,
अरे सुनो में बहोत बेकार सक्स हूँ यार ,
जिसको भी मिलता हु बस बद्दुआ से मिलता हूँ। 
और तुमने तो बोहोत देखे है मेरे जैसे ,
पर तुम देखना एक दिन सबसे अलग दिखूंगा में ,
और लगे जो कभी कही बाजारे इश्क़ तो बेचना मेरी जान ,
तुम देख लेना सबसे महंगा बिकूँगा में। 
और ये सुनने वाले ये पढ़ने वाले भी तुमसे ,
मोहब्बत करेंगे ऐ-मेरी-मोहब्बत तुम्हे इस कदर लिखूंगा में ,
मालूम है मेरी मोत का मंजर मेरे भाई ,
मेरे हांथो की लकीर में लिखा है उन्हें लिखकर ही मिटूँगा में। 
और कभी भी बुझ सकता है मेरे दिल का दिया ,
 एक बेवफ़ा हवा के झोको में रखा है ,
और मुझे भी न हो मेरे दर्द का अहसास ,
इसलिए मेने खुद को भी उसके लोट आने के इंतजार के धोखे में रखा है। 
और रिश्तेदारियों के डोर भी अब बड़ी नाजुक सी लगती है ,
इस दौर में रिश्तों का सारा अहसास सिर्फ और सिर्फ नोटों में रखा है। 
कौन क्या कहता है मेरे बारे में किसी की खबर नहीं रखता ,
राजा जाना जाता है सिर्फ दोस्ती से में किसी दुश्मनों पर नजर नहीं रखता ,
और तुम जानते हो मेरी कमजोरी ये सोचकर खुश हो ,
अरे सुनो में सिवाए ऊपर वाले के किसी से नहीं डरता। 

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