तुम्हारे बिना मुझे तो मुस्कुराना भी नहीं आता।

 Hindi Poetry में आप सभी लोगो का स्वागत है , दोस्तों अगर आपलोगो को Poetry पढ़ना अच्छा लगता है तो आप बिलकुल सही वेबसाइट पर आये है। हमारे वेबसाइट में Hindi me Kabita,Poems of Life in HindiLovers Life Poem in Hindi, Breakup Poems in Hindi  इन सभी Topics के ऊपर हिंदी में कबिताएँ होती है।  हाँ तो दोस्तों आज जो हमारी कबिता है वो दो आशिको कि है अगर आपने भी किसी से प्यार किया हैं तो आपके दिल को भी जरूर छुएगा ये कबिता।

*तुम्हारे बिना मुझे तो मुस्कुराना भी नहीं आता:-

तुम्हारे बिना मुझे तो मुस्कुराना भी नहीं आता।


मेरा बोलना,मेरा लिखना बेकार न समझो,
 शब्द और लहजा मैंने पढ़कर कमाया हैं,
देखकर तुम तो कुछ भी कह देते हो,
किसी को सोच कर लिखना मुझे मुद्द्तो बाद आया हैं।
आसमां मे टुटता तारा मत ढूढ़ना,
मुझे खो दो तो फिर दोबारा मत ढूढ़ना,
समंदर मे उतरो तो बेबाक उतरना,
और जब तैरना सिख़ जाओ तो फिर किनारा मत ढूंढना।
हाँ मानता हूँ सच के साथ चलना थोड़ा मुश्किल तो है,
मगर चल दो तो फिर झूठ का सहारा मत ढूढ़ना।
और बात-बात पे कहती हो किसी और को पसंद कर लो,
मगर सच तो ये हैं मेरी जान कि मुझे किसी और से दिल लगाना भी नहीं आता,
और तुम्हारे बिना मुझे तो मुस्कुराना भी नहीं आता।
और तुम मोहब्बत हो मेरी,
मुझे मोहब्बत करने के अलावा और कुछ भी नहीं आता।
तुम मुझसे पुछोगी अगर की मे कौन हूँ तुम्हारी?
तो सुनो कि साँस,दिल,धड़कन,रूह,जाति, धर्म और 
तुम्हें अपना ईमान लिखूंगा,
घर,गली,शहर,दुनियां क्या में तो तुम्हें अपना ब्रह्माण्ड लिखूंगा। बेटी को देखकर तुम्हें पिता का मुस्कुराना लिखता हूँ,
तुम नहीं ज़माने से मे तुम्हें हि सारा जमाना लिखता हूँ।
माटी का महकना तो कभी तारों का टिमटिमाना लिखता हूँ,
माँ को देखकर तुम्हें सुबकते बच्चे का चुप हो जाना लिखता हूँ। तुम्हारी उदासी को हिमालय का पिघलना लिखता हूँ,
और तुम्हारी मुस्कुराहट को,
फूलो का खिलना तो कभी सूरज का निकलना लिखता हूँ।
पर मुझे तुमसे खुश रहने कि दुआ नहीं चाहिए,
क्या करूँगा उस दौलत को लेकर अगर तुम साथ न होगी,
फकत मुझको तो सिर्फ तेरी बाहों का सिरहना चाहिए।
कि खूबसूरत माकन हो जिसको चाहत रख लो,
मुझको तो तेरे साथ एक छोटा सा असियना चाहिए।
और तुम मेरी मंजिल ना पूछा करो,
मुझको तो बस तेरी पलकों के नीचे ठिकाना चाहिए।
कोई मुझे गलत कह दे या पागल कह दे धक्का नहीं लगता,
पर मे सही हूँ जब तुम गलत कह दो तो अच्छा नहीं लगता।
यूँ तो जमाने मे है और भी हसीन लोग,
मगर आँखे खराब है मेरी कोई तुमसा नहीं लगता।
बहोत मिलता हूँ लोगों से ,
में हसता हूँ और खिलता भी हूँ,
मगर सच है यही जाना उन्हें आखोंं मे रखता हूँ,
उन्हें दिल मे नहीं रखता।
और तुम मोहब्बत हो मेरी जान,
मोहब्बत के अलावा और मुझे कुछ नहीं आता।

Post a Comment

0 Comments