मेरे गालो को तेरे गुलाल का इंतजार अब भी है!

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*मेरे गालो को तेरे गुलाल का इंतजार अब भी है:-

मेरे गालो को तेरे गुलाल का इंतजार अब भी है



कहा था न मुझसे दूर रहो,
देखो तुम्हारा रंग अब छूट ही नहीं रहा ,
भांग का नशा तो कब का उतर गया,
 ये तुम्हारा नशा है जो टूट ही नहीं रहा।
क्या ही ख़ुशी रह गई थी इस होली की ,
इसबार तुम जो मेरे साथ नहीं थी,
रंग लगाने वाले तो बहुत थे,
मगर उनमे वो बात नहीं थी ,
ऐसा नहीं है की मुझे रंगों से परहेज है,
बस और किसी का मुझपर रंग नहीं चढ़ता,
तुम्हारे होने से ही मेरी होली-दिवली थी,
और किसी से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता,
की रंगों में कितने ही मसरूफ थी?
जो मेरा ख्याल तक नहीं आया,
होली तो आकर चली भी गई पर तेरा ग़ुलाल अभी तक नहीं आया,
कुछ तो असर बाकी तेरा इस्तेहर में अब भी है,
जो मेरे ये गालो को तेरे ग़ुलाल का इंतजार अब भी है।
में तो कब का भुला चुका हूँ तुमको,
मगर ये कमवक़्त दिल तेरे प्यार में अब भी है,
और वो रंग आज भी मेरा फेब्रेट है,
जो कभी तुमने मुझे लगाया था,
बस फर्क सिर्फ इतना है की,
तुमने पानी और मैंने इश्क़ मिलाया था।
ये होली तुम्हारा भी वही हाल होना चाहिए था,
तुम्हारे भी एक हाथ में इश्क़ तो दूसरे में ग़ुलाल होना चाहिए था।
मगर अब तो मेरा जिक्र भी कहा तुम्हारे ख्यालो में होगा,
अब तो मेरे हिस्से का रंग किसी और के गालो पर होगा,
मगर ये पानी मिला रंग कच्चा होता है मेरी जान,
ये कुछ पल भर में ही चेहरे से उतर जाएगा,
वो भी मन भरेगा तुमसे और अपने वादो से मुकर जाएगा।
तुम फिर लौटकर मेरी जिंदगी में वापस आना चाहोगी,
तुम फिर सबसे पहले मेरे गालो पर रंग लगाना चाहोगी,
तुम चिखोगी,चिल्लओगी दर-बदर तमाशा करोगी,
तुम हाथोंं में रंग लेकर गैरो से मेरे बारे में पूछा करोगी।
तुम्हारे आंसुओ के हर कतरे के साथ तुम्हें पछ्तवा तो जरूर होगा,
तब बताओ मेरी जान तुम्हें किसके मोहब्बत पर गुरुर होगा,
खैर छोड़ो इन बातों को अब चली गई तो चली जाओ,
लौटकर तो अब हम भी नहीं आएँगे,
किसी को भी बिना पूछे रंग तो लगा लेंगे,
 मगर कभी फिर से किसी से भी दिल नहीं लगाएंगे।
नए रंग नए लोग और तुम्हें वो तुम्हारा नया यार मुबरक मेरी जान,
तुम्हें रंगों का ये त्यौहार मुबारक मेरी जान।

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