टूट कर पेड़ से फल कभी वापस जुड़ा नहीं करते

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*टूट कर पेड़ से फल कभी वापस जुड़ा नहीं करते:-

टूट कर पेड़ से फल कभी वापस जुड़ा नहीं करते।


 अच्छे हो या बुरे हो फर्ज से मुकरा नहीं करते ,
और टूट कर पेड़ से फल कभी वापस जुड़ा नहीं करते। 
यहाँ जिंदगी जीना है तो बेखौफ जियो ,
एहसानों तले जिंदगी जिया नहीं करते। 
और अगर तुम सच में सच्चे हो तो सच पर अड़े रहो ,
बेवजह झूठी दलीले दिया नहीं करते। 
और जहाँ मुनाफा हो ग्राहक वही रुकता है ,
बाजारों में दुकानदार फिरा नहीं करते। 
और शहर छोड़ो गाँव का माहौल भी अलग है ,
आजकल एक ही छत के नीचे दो भाई रुका नहीं करते। 
मेरे ख्याल से सब अच्छा है ,
जो न देखा बस वही सच्चा है ,
और यहाँ हर सक्स का फितरत है बदलना ,
जो न बदले बस वही बच्चा है। 
सियासत में सियासी जो चाहे वो करता है ,
पकड़ा गया तो झूठ वरना सब सच्चा है। 
आराम-हराम है कहना बड़ा सरल है ,
मजदुर बन कर जानो तो अच्छा है ,
अमीर बनना चाहते हो , तो हाथ के सच्चे रहो ,
सच में आज का ईमान बहोत कच्चा है। 
कुछ तो वजह रही होगी जो मुझसे न कही होगी ,
मुझे यकीन है वो मुझे छोड़ कर नहीं जाती सच में कोई वजह बवाल रही होगी। 
और ये कुदरत का करिश्मा है की गम में आखो से आँसू आते है ,
वरना बेवजह आँखे कहाँ लाल रही होगी ,
कहने को तो हर सक्स इश्क़ में वफ़ा करता है ,
फिर ये सबसे पहले बेवफाई किसके सर रही होगी ?
लैला-मजनू , हीर-राँझा इन्हे तो सब ने जाना है ,
फिर इनकी पाक मोहब्बत में क्या कमी रही होगी ?
क्या कहा जमाना खिलाफ था इनके ,
गलत 
सच में ऊपर वाले की मर्जी रही होगी। 

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