मुझे माफ़ करना मेरी जान अब इस काबिल नहीं हो तुम।

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*मुझे माफ़ करना मेरी जान अब इस काबिल नहीं हो तुम:-

मुझे माफ़ करना मेरी जान अब इस काबिल नहीं हो तुम।



मुझे माफ़ करना मेरी जान अब इस काबिल नहीं हो तुम।
तो मसरूफ हो ना आजकल अपनी नई मोहब्बत के साथ,
सुना है वो बात-बात पर झगड़ता नहीं,
और तुम तरसती हो उसे मनाने के लिए,
सुना है जिस्म तक की नजदीकियाँ बढ़ा चुकी हो उसके साथ,
सिर्फ मुझसे दूर जाने के लिए।
सुना है वो I Love You Text में नहीं तुम्हारी हाथोंं पर लिखता है,
फिर क्यों आँखे नम हो जाती है तुम्हारी,
जिस दिन तुम्हें उसमें में नहीं दिखता।
वो सुबह-सुबह फोन करके तुम्हें उठाता तो नहीं होगा,
तुम्हें छूने से पहले दो पल अपने नजरो के सामने बैठाता तो नहीं होगा,
यूँ वादें तो वो बड़े-बड़े करता होगा बिल्क़ुल तुम्हारी तरह,
पर उन्हें निभाना नहीं जानता होगा,
यूँ हाथ पकड़कर दिलासे तो खूब देता होगा तुम्हें,
मगर तुम्हारी आँख से बस बहने ही वाले अस्क को अपने उंगलियों पर उठाना तो नहीं जानता होगा।
तो बता कौन मेरी तरह तेरे आधे झूठ को भी पूरा सच मान जायगा,
कौन मांगेगा खैर तेरी ये जानते हुए भी की हर दफा तू उसकी झूठी कसम खायेगी,
कोई कर सके ये मुझसा प्यार एक बार फिर तुझे इस दुनियां में,
मुझे माफ़ करना मेरी जान इस काबिल नहीं हो तुम।
सुना है की तुम्हें बात-बात पर कसमें खानी पड़ती है,
क्योंकि वो तुमपर ज़रा सा भी एतबार नहीं करता,
और गुस्सा होने पर फोन मत करना कहकर ,
सच में तुम्हारे फोन का इंतजार भी नहीं करता।
सुना है तुम्हें सीने से लगाने से पहले वो तुम्हें चुमना पसंद करता है,
साथ वक़्त बिताने जैसे इश्क़ की उसे समझ नहीं इसलिए ,
तुम्हारे साथ हमेशा घूमना पसंद करता है।
सुना है जिस बिषय पे तुम दोनों बात करती हो,
वो भी में ही होता हूँ,
तुम उसे कहती हो की तुम मेरे लिए नहीं आज भी 
तुम्हारे लिए में रोता हूँ,
तो तुम बिल्क़ुल सही कहती हो,
क्योंकि दो पल का भी सुकून तुम किसी को दे सको,
उसकी खुशियों की हिफाजत कर उसके गमो को अपना कह सको,
अरे चढ़कर सूली इश्क़ की तुम दर्दो को सह सको,
मुझे माफ़ करना मेरी जान इस काबिल नहीं हो तुम।
सुना है मँहगे तोहफ़े देता है वो तुमको और तुम भी मना नहीं करती,
सूट पहनती हो जिसदिन तुम दुपट्टे को उसके चेहरे पर लहराकर अपने इश्क़ का इजहार करती हो,
वाह यार क्या खूबी है तुम्हारी भी,
जिस-जिस से तुम मिलती हो उसे अपना बना रही हो।
जो पीछे छूट रहे है उन्हें कल रात का सपना बता रही हो,
इन सब के बाद भी वफ़ा की बातें करती हो,
खुदा का खौफ करो हर शाम एक नए सक्स से मुलाकात करती हो।
तुम मुझे अभी भी प्यार करते हो कहकर फसा सके,
वो कसमें, वो वादे याद दिलाकर मुझे रुला सके,
खुद को इन बेवफाई के सलाखों के पीछे से आजाद कर सके,
एक बार फिर मेरे जिंदगी का रास्ता ढूढ़कर मुझे बर्बाद करने आ सके,
तो मुझे माफ़ करना मेरी जान अब इस काबिल भी नहीं हो तुम।
और सुना है शायर है वो भी मेरी तरह पर,
तुम्हारे बारे में तो एक भी बात नहीं लिखता,
हा खूबसूरत अल्फाज जरूर लिखता होगा वो,
मगर सुना है मेरी तरह जज़्बात नहीं लिखता।
सुना है तुम रोक-टोक करती हो,
फिर भी वो अपना मनमानी करता है,
पर अफ़सोस वो तुम्हारी मुस्कुराने की वजह नहीं बन पाता है,
जब भी तुम कोई नादानी करती हो।
किन-किन बातों से तुम्हारा दिल दुखता है,
वो ये भी नहीं जानता और क्या कहता है?
इश्क़ करता है और इश्क़ के वसुलो को भी नहीं मानता है।
सुना है मनाता नहीं तुम्हें ये पुछ्कर कहीं खफा तो नहीं ,
अरे अभी भी वक़्त है जा पूछ उससे,
की कहीं तू भी मेरी तरह बेवफा तो नहीं।
और माफ़ करना अगर तुझे लगा हो मैंने बेइज्जत किया है,
तुझे ये शायरी लिखकर,
मगर मेरी लिखी शायरी के वो हर लफ्ज में लिपटी इज्ज़त तुझे मिल सके,
मुझे माफ़ करना मेरी जान अब इस काबिल भी नहीं बची हो तुम।


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