सुनो न कभी देखोगी मेरे ये आंसू तो क्या तुम लोट आओगी?

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कभी सोचा है हर गुनाह की सजा होती हैं,
पर किसी का दिल तोड़ने की कोई सजा नहीं होती,
मुझ जैसे कई लोग लिख तो लेते हैं इस दर्द पे,
पर किसी का दर्द कोई जान नहीं सका,
क्योंकि इस दर्द की कोई सूरत नहीं होती।

*सुनो न कभी देखोगी मेरे ये आंसू तो क्या तुम लोट आओगी:-

सुनो न कभी देखोगी मेरे ये आंसू तो क्या तुम लोट आओगी?


 जुदा हो के भी दिल अक्सर याद करता है उसे,
सोचता है क्या वो भी मुझे याद करती होगी,
जैसे आसमान रो पड़ता है ज़मीन की याद में,
और बारिश की बुँदे भेजता है फरयाद में,
खैर बारिश की बुँदे तो नहीं मेरे पास पर,
इन आखोंं आँखो के आंसुओ में तुम बस तुम ही पाओगी,
और सुनो न कभी देखोगी मेरे ये आंसू तो,
 क्या तुम लोट आओगी?
याद आते है वो पल अपने तूने किये थे जो झूठे वादे,
और मैंने देखे थे जो सच्चे सपने याद आते है,
याद आता है मुझे मेरे हारे हुए प्यार का वो इजहार,
सुन के भी अनसुनी की थी जो तूने मेरे दिल की वो बातें हज़ार,
पर आज भी टूटी हुई नींद के बिखरे हुए सपनो में,
तुम और बस तुम ही पाओगी,
और सुनो न कभी देखोगी मेरा ये दर्द ,
तो क्या तुम लोट आओगी?
अक्सर आँखे मूंद लेता हूँ और सोचता हूँ,
बंद आँखो में ही सही कुछ हसीन पल बिता लूँ तुम्हारे साथ,
पर ये क्म्ब्खत आंसू आखोंं में समां ही नहीं पाते है,
और जब आँख खोला मैंने उन अस्को को रिहा करने के लिए,
तो उन अस्को में भी तेरी तस्वीर को बनते देखा मैंने,
अब मानो बर्बाद सा हो गया हूँ तेरे जाने के बाद,
अब इन यादो में खुदा से की गई उन 100-100 बातों में,
तुम और बस तुम ही पाओगी,
और सुनो न कभी देखोगी मेरा ये प्यार तो,
क्या तुम लोट आओगी?
में ये भी जानता हूँ की में तो वो पन्ना हूँ,
तेरी जिंदगी के किताब का,
जिसे तू एक दफा पलट के देखना तक न चाहती हो,
पढ़ना तो खैर बहुत दूर की बात है।
पर क्या तुम जानती हो?
हमने तो कुछ इस तरह लिखा है,
तुम्हें अपने जिंदगी के किताब में,
की आज अरसा बाद भी हम हमारा लिखा तक मिटा न पाये,
और अब कोशिश भी नहीं है उन यारों यादो को मिटाने की,
अब मेरी यादो में मेरा सुन के भी अनसुना किये गये उन सो जज्बातों में तुम और बस तुम ही पाओगी,
और सुनो न कभी पढेगी मेरी ये कबिता तो ,
क्या तुम लोट आओगी?

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