सुनो ना सच सच बताओ कभी-कभी ही सही पर याद तो आता होगा ना

 *सुनो ना सच सच बताओ कभी-कभी ही सही पर याद तो आता होगा ना:-

सुनो ना सच सच बताओ कभी-कभी ही सही पर याद तो आता होगा ना


सच सच बताओ ना ख्याल तो आता होगा ना,
गलती से ही सही पर तुम्हारी होठों पे मेरा नाम तो आता होगा ना,
और जो वक्त बिताया था हम दोनों ने साथ में मिलकर,
कभी कभी ही सही पर याद तो आता होगा ना,
बताओ ना याद तो आता होगा ना,
क्या वजह थी हमारे दूर जाने की,
ये सवाल भी मन में आता होगा ना,
और फिर याद करके खुद की बेवफाई तुम्हे,
जवाब तो मिल जाता होगा ना,
और मैं किस के साथ किस हाल पे जी रहा हूं,
ये सवाल भी तो तुम्हारे मन में आता होगा ना।
और सच सच बताओ ना कभी कभी ही सही पर याद तो आता होगा ना,
तू कभी कभी अपने नए साथी को भी आजमाती होगी ना,
और क्या वो भी मेरी तरह प्यार करता है,
ये देखना तो चाहती होगी ना,
पर जब लगता होगा तुझे की मेरे जैसा तो कोई नही है,
तो थोड़ा बहुत गुस्सा तो तुझे खुद पर भी आता होगा ना,
और सच सच बताओ ना,
कभी कभी ही सही पर याद तो आता होगा ना,
मेरी तरह उसे भी झूठे ख्वाब दिखाती होगी ना,
और हर छोटी छोटी बात पर उसे भी झूठ बोल जाती होगी ना,
पर जब देखती होगी उसे तो कभी परवाह ही नही,
तो मेरा चेहरा भी तेरे आखों के सामने आता होगा ना,
और सुनो ना सच सच बताओ कभी कभी ही सही पर याद तो आता होगा ना,
वो साथ बिताया वक्त मेरी याद तो दिलाता होगा ना।


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