बेवफा निकली रानी मेरी।

 * बेवफा निकली रानी मेरी:-

यार बेवफा निकली रानी मेरी।


तेरे शहर से मोहब्बत यानी तुझसे मोहब्बत,
किसी और को भी हैं ऐसी ही मुझसे मोहब्बत,
अब और नहीं कर सकता इंतजार तेरा,
अब मुझे भी है किसी और से मोहब्बत।
इश्क में फायदा-नुकसान तो देखा नही जाता,
पर क्या मिला तुझे करके उससे मोहब्बत,
और अगर करे कोई दावा तुझसे बेइंतहा इश्क का,
तो एक दफा याद कर लेना तुम हो मेरी मोहब्बत।
उन आंखो का नशा उतारने के लिए,
की है मेने इस शराब से मोहब्बत,
और हम सब खुदा के बंदे है मेरी जान,
इसलिए खुदा सलामत रखे तुम्हारी मोहब्बत,
और मेरे हाल बताते हैं कहानी मेरी,
यार बेवफा निकली रानी मेरी।
उसकी गलतियों पर भी चुप रहा हूं में,
फिर भी उसकी आंख में चुभ रहा हूं में,
और वो आजकल बेवजह फोन करने लगी है,
शायद उसे ख्वाब में दिख रहा हूं में।
और शायद यही कही भीड़ में है तेरा नया आशिक ,
मुझे यहां देखकर तकलीफ़ में है तेरा नया आशिक,
और घर पहुंचते ही यकीनन फोन करेगी मुझे,
तब पूछूंगा तुमसे की कहा है तेरा नया आशिक,
और आज किसी और लड़के के साथ दिखी मुझे,
शायद पुराना हो गया वो तेरा नया आशिक,
और अब मुझे तो मत ही सुना तू दुखड़ा अपना,
अब भाड़ में जाए तू और तेरा नया आशिक।
 घटिया फितरत वाले ज्यादा इज्जत सह नहीं पाते,
इन छोटे सेलाबो से पहाड़ बह नही जाते,
और ईमानदारी से जीना ही खुददारी है मेरी,
किसी की बातो में आकर मेने किसी की तलवे नही चाटे।
और मैं एकतरफा मोहब्बत को अधूरा नही समझता,
वो जुदा है मुझसे पर दूरी नही समझता,
लोग अब ये भी बहाना बनाते हैं छोड़ जाने का,
घर वाले है यार मजबूरी नहीं समझता।
ये दिल टूटा था पहले से अब और भी बिखर जाएगा,
छोड़ गया है वो सक्स जो कहता था कि सबकुछ सवर जाएगा,
और अब सीने में दिल नही पत्थर चाहिए ,
वरना इश्क करने वाला इश्क करते ही मर जाएगा।
और जिसे ये जमाना अब भी अच्छा लगता है,
मेरी कहानी सुन लेगा तो सारा वहम उतर जाएगा,
और घर में जिसके लबों से शराब शब्द नहीं निकलता था,
बेचारा हाथ में बोतल ले के आज घर जाएगा।
और सुनो मेरी जान सच्चे इश्क वाले यहां संभल नहीं पाते,
और आदत तुम्हारी वाली होती तो हम भी कब का बदल जाते। 

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