अपनी शादी का बुलावा देना में आऊंगा जरूर।

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*अपनी शादी का बुलावा देना में आऊंगा जरूर:-

अपनी शादी का बुलावा देना में आऊंगा जरूर


 रास्तों में बेसक कितनी भी दूरी रही थी,
पर हर पल तू मेरे लिए जरूरी रही थी,
आजतक एक सवाल जहन में घर कर गया है मेरे,
खुद छोड़ा था तूने या फिर कोई मजबूरी रही थी।
मेरे घर की दीवारें और ये दरवाजा बोलता है,
पुकारता है तुझे वापस आ जा बोलता है,
दिल कुछ इस तरह से हुकूमत चलता है मुझपर,
जैसे अपनी प्रजा पर से कोई राजा चलाता है।
और वो चुपके से पास आती है रातों में,
एक चेहरा बहुत सताती है इन रातों में,
वो सारा दिन ख़ामोशी से बस मेरी सुनती है,
सुनकर फिर अपनी सुनाती है रातों में,
वो शराब तो छूने तक नही देती मुझे,
सिर्फ अपनी आंखो से ही पिलाती है रातों में,
सारा दिन बेशक रूठी रहे मुझसे,
पर बड़ी मोहब्बत से फिर मनाती है रातों में,
और घर वाले यही सोचकर परेशान रहते है आजकल,
की ये लड़का जाने कहा जाता है इन रातों में,
ये राजा अपनी गजलों में तेरा नाम लिखता है,
लिखकर फिर उसे मिटाता है इन रातों में।
और देख ना तेरे जाने के बाद भी ये जिंदगी थमी नहीं,
सबकुछ है मेरे पास अब कोई कमी नहीं,
तेरी यादों को अपनी जहन से निकाल फेका हमने,
खिलखिला उठे है अब आंखो में भी नमी नही है,
अब जिंदगी की इस सफर में अकेले ही निकल पड़ा हूं मैं,
जहां छोड़ा था तूने वहीं से तो अब चल पड़ा हूं में,
अब किसी को खोने का डर नही सताएगा,
मंजिल का रास्ता तुझे अब कोई नही बताएगा,
रातों का जुगनू बनकर तुझे खुद राहें ढूढनी है,
जो तेरे लिए सच्ची हो, अच्छी हो ऐसी बांहे ढुढनी हैं,
कोई सिकवा न उसकी रुसवाई से करेंगे,
जिसमे गिरेंगे बार-बार मोहब्बत भी उसी खाई से करेंगे,
और मेरे प्यार में ही कोई कमी रही होगी ये सोचकर,
अगली दफा का इश्क और गहराई से करेंगे।
चलो ये झूठ है पर इसे हकीकत हर दफा लिखूंगा में,
पढ़ सके ये जमाना सारा इतना सफा लिखूंगा में,
तुम बदले थे ये कब से सुन रही हैं ये दुनियां,
आज नज्म में खुद को बेवफ़ा लिखूंगा में,
तुमने मनाया होगा पर में ही माना नही शायद, 
तुमको तो आता था पर मुझे ही नहीं आया निभाना शायद,
तुम तो चाहती थी हम जनम-जनम के लिए एक हो जाए,
पर में ही नहीं चाहता था तुमको पाना शायद,
शायद मेने ही इंतजार नही किया होगा,
तुमने तो किया था पर मेने ही प्यार नही किया होगा,
चल सारी गलती मेरी है आज कबूल करता हूं,
रोजाना तुझे याद करके वक्त फिजूल करता हूं,
अब इन आंखो को तेरा इंतजार नहीं है,
नहीं ऐसा नहीं की तुझसे प्यार नही है,
पर फिर से तुझे पा सकू मेरी इतनी ओकत कहां,
तुझमें तो है जान पर मुझमें वो बात कहां,
खेर अपनी शादी का बुलावा देना में आऊंगा जरूर,
एक ही निवाला सही पर खाऊंगा जरूर,
आखिर कबतक तुझे याद करता रहूंगा,
उस दिन सब के सर पे सहरे देखूंगा में,
पूरी रात रुककर सातों फेरे देखूंगा में,
वो सात वचन जब लोगी तुम,
ईश्वर की कसम जब लोगी तुम,
तुम्हारी आंखो में शर्म देखनी है मुझे,
उस आग की लपटे भी चीख उठे अग्नि इतनी गरम देखनी है मुझे,
उस दिन के बाद हर रात मे नाचूंगा में,
जिस दिन तेरी बारात में नाचूंगा में,
और कोई पूछेगा बिदाई के वक्त आंखो मे आंसू क्यों नहीं,
में हंसकर कह दूंगा मेरी महबूब की शादी है में नाचू क्यों नहीं।

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