एक तरफा मोहब्बत।

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* एक तरफा मोहब्बत:-

एक तरफा मोहब्बत।

वो मेरे साथ रहती है मगर मुझमें नहीं रहती,
वो जैसा मुझमें रहती है में क्यों उसमे नहीं रहता,
सभी रहते हैं उसके दिल में जो नजदीक है उसके,
में रह रहकर करीब उसके भी उस दिल में नही रहता।
की मेरे सीने में है चुभती ये हदे रिश्तों में जब आए,
में बातों में रहता हूं में यादों में नही रहता,
और जो मेरा है फकत मेरा है ये जज्बा वो रखते हैं,
इसी जज्बे से क्यों उनके इरादों में नही रहता।
की हुकूमत करते हैं मुझपे मगर अफसोस रहता है,
की में मुट्ठी में रहता हूं उसकी लकीरों में नही रहता,
और सभी मतलब से मिलते हैं फकत एक इस वजह से,
में नही रहता गैरो में,
में अपनो में भी नही रहता।
वो कहती हैं मैं तेरी हूं सनम मुझपर यकीन कर लो,
मगर उसके इरादों से यकीन उसपर नही रहता,
और भरोसा नाम है जिसका बड़ी मुस्किल से होता है,
ये होता है तो रहता है नही हो तो नही रहता।
वो भर के पेट को आधा है करता फिक्र ओरो की,
गरीबों का हुनर है ये अमीरों में नही रहता,
और मोहब्बत नाम है खोने का तो खो देते हैं अक्सर,
की आशिकों का अमल है ये रकीबो में नही रहता।
और जरा देखो उनकी जुल्मों की इंतहा,
में रहता हूं इबादत में दुआओं में नही रहता,
तुझे लगता है के राजा तुझे आवाज दी उसने,
मगर तू सौर में है बस सदाओं में नही रहता,
और सुनो अगर मेरी तारीफ करनी हो तो बस इतना ही कर देना,
जगह जो ढूंढता हूं में तुम्हारे दिल में मुझे वो सिर्फ अपने दिल में दे देना।

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