प्यार के नाम पर यहां सिर्फ जिस्म चाहता है हर कोई।

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 दर्द के बारे है जो कोई जान नहीं सकता, आज इसी दर्द के बारे में लिखने की कोशिश की है।

*प्यार के नाम पर यहां सिर्फ जिस्म चाहता है हर कोई:-

प्यार के नाम पर यहां सिर्फ जिस्म चाहता है हर कोई।


 में शांत हूं अब रुक सा गया हूं,
अब कोई अल्फाज याद नही आता में थम सा गया हूं,
और मजहब और धर्म के बीच में इंसानियत भूल सा गया हूं,
में शांत हूं अब थम सा गया हूं।
अंधेरे में रहने की आदत है अब रोशनी से दूरी बनाने लगा हूं,
मेरे साथ मेरे शब्दों का सफर भी थम सा गया है,
 मंजिल को पाने की दौर में अपनो को खोने लगा हूं,
और क्या बताऊं क्या हाल है हमारा,
बाहर से खुश हूं लेकिन अंदर से टूट सा गया हूं,
में शांत हूं अब थम सा गया हूं।
में आवारा पागल एक बादल हूं,
तुम उसकी पहली बरसती बूंद हो,
में प्यासा जमीन हूं आज भी तेरे इंतजार में,
और तू मुझसे आसमान जितनी दूर हो।
मेने तो बस तेरे लबों को चूमा था,
फिर ये अख़बार में मेरी मौत की खबर कैसी है,
और क्या में मर चुका हूं?
अगर नही तो तेरे बगीचे में मेरी कब्र कैसी है?
में तेरी बेवफाई से रूबरू हो चुका हूं,
अब तेरी वफा पे जरा भी यकीन नहीं है,
और क्या कहा आज की चाय तुमने बनाई है?
पहले तू पी मुझे आज भी तुझपे यकीन नहीं है,
और तुम्हारी बेवफाई तुम्हे मुबारक हो,
दर्द हमे हो तो ये सुकून तुम्हे मुबारक हो,
बस अब में चलता हूं तुम्हारे जिंदगी से,
ये चांदनी रात तुम्हे मुबारक हो,
और खुद से लिखी हर सैर याद रखता हूं,
में शांत हूं मगर हर बात याद रखता हूं,
जिन्होंने नजरे मिलाना छोड़ दिया मुझसे,
में उनकी शक्ले नही लहजे याद रखता हूं।
और हमपे इल्जाम ना लगाया करो बफाऐं इश्क का,
हमने तो तेरी रूह को अपना बनाया है,
और तेरा जिस्म,प्यार,वफा सब तुझे ही मुबारक,
हमे तो हमारी शराब ने जीना सिखाया है।
तेरे सर पे चढ़ा वो बुखार हो जाऊंगा,
में इस मयखाने की सबसे महंगी शराब हो जाऊंगा,
और मत करना कोशिश मुझसे दूर जाने की,
में तेरे बाद तेरी तस्वीर के लिए दीवार हो जाऊंगा।
हम इतने भी बुरे नही जितना तुम बता रही हो,
हमने तो बस दिल लगाने की बात की तुम गलत जा रही हो,
और शायद किसी की बातों में आ चुकी हो तुम,
सच बताओ खुश बहोत हो या अपने आंसू छुपा रही हो।
एक रात को बादल हटे तो सितारों से मुलाकात हुई,
फिर कुछ वक्त बाद मेरी चांद से बात हुई,
और आसमानों के नीचे वो रात यू ही गुजार दी हमने,
जब सुबह उठे तो घर जाने की बात हुई,
और उसे डर लगने लगा है एक अजनबी के बातों से,
जब जिक्र उसके आशिक का हुआ और मेरी बात हुई,
और आज फिर रकीब ने गुस्से से मुड़कर देखा मुझको,
लगता हैं उनकी बातों-बातों में फिर मेरी बात हुई,
और उसने साथ निभाने का वादा मुझसे भी किया था कभी,
लगता हैं आज रकीब से भी उसी वादें की बात हुई,
और आज रोती हुई दिखी तो उससे पूछ ही लिया मेने,
क्या इसी दिन के लिए तेरी वो तमाम रात हुई।
और सुनो जिस्मों के व्यापारी है यहां हर कोई,
प्यार के नाम पर यहां सिर्फ जिस्म चाहता है हर कोई,
न इज्जत न शर्म है इनमे कभी ओरत तो कभी बच्ची,
यहां पैसों से जिस्म चाहता है हर कोई,
इंसानियत को पैसों से बेच चुका है हर कोई,
इज्जत तो बची नही इनमे यहां दिल से हिंदुस्तान बेच चुका है हर कोई।

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