नशा किया पर हुआ नहीं।

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नशा किया पर हुआ नहीं।


 सारी उम्र मुखोटा लगाए रखा सबसे को सच छुपाए रखा,
जिस एक सक्स को लोग सब सच बताते थे,
हमने उसे भी सेर सुनाये उलझा रखा,
अंदर से चीख के जब आवाज आने लगी,
खुद को वजह बनाये रखा,
और सारी जिंदगी खत्म हो गई एक बहस पे,
तुम गलत थे यार तुमने गलत जगह दिल लगाए रखा।
पांव मेरे कट क्यों नहीं जाते आप सबको पसंद क्यो नही आते,
सुना है लोग जानते हैं तुम्हे पर साथ कोई नही,
यार इससे अच्छा आप मर क्यो नही जाते,
सिक्का उछाल रहे हो फिर से झूठा सच दिखाना है,
बचा लो खुद को कल तो पकड़े ही जाना है,
कबतक बचोगी मेरे सेर से कल को कहोगी ये मेरा गुजरा जमाना है।
यार नशा तो किया पर हुआ नही,
ये जिंदगी से बड़ा कोई जुआ नही,
इश्क़ हुआ लब मिले पर मलाल ये है कि लब मिले पर कुछ हुआ नही,
एक लड़की मंजिल का रास्ता बताती थी,
आदत अच्छी थी कागज़ों पे तस्वीर बनाती थी,
6 दिन थे दफ्तर के 7वें दिन वो मिलने आती थी,
तोहफे में गुलाब तो सब देते हैं,
वो मुस्कुराके मुझे पता बताती थी,
उसकी आंखें आईना थी हमारे लिए वो गले मिल के मेरा हाल बताती थी।
और मेने करी है मेहनत सो असर आया है,
मुझमे से निकलकर कोई और आया है,
तुम्हारा काम है तंज कसना सो कस लो मेने मुझे सबर सिखाया है।
तंजो पे दाद मिलती हैं आजकल ये शायरी सुनने कोन आता है,
और तुम क्या समझोगी जानी तुम्हे तो बस बातें बनाना आता  है,
काफिले लड़ रहे है आजकल,
ये कोन है जो ख्यालों को गज़ल बताता है।
फुरसत में मिलना तो बताएंगे तुमपे जो बीती हैं हम बताएंगे,
तुम्हारा काम है तंज कसना सो कस लो,
हम तुम्हारी आँखों को देखकर चुपचाप निकल जाएंगे।
एक हुक्म जारी हुआ है जो न होना था वही हुआ है,
सरहद पार कर दिए गए तुम और मैं यानी उसका निकाह हुआ है,
में खुद किसी का होना चाहता हूं,
पर मैने खुद को रोका हुआ है।
एक ही साथ में बैठेंगे तुम ओर में वहाँ,
कोई पूछेगा तो कह दूंगा बस हमारा झगड़ा हुआ है।
बस एक वादे ने रोक रखा है हमे,
वरना एक सेलाब मेरे अंदर भी दबा हुआ है,
परदे में रखते है असली मोहब्बत को,
ऐसे लोगों से मेरा राबता बहोत हुआ है,
एक तस्वीर से एक रास्ता निकाल सकता हूं मैं, 
एक तस्वीर में ही सही पर तेरे हाथों में आ सकता हुँ मैं,
तु समझे मुझे और मैं समझू तुम्हे,
यकीन मानो कैसी तस्वीर भी बना सकता हूँ मैं,
दरियां किनारें मुसाफिरों का इंतज़ार रहता था,
में नए सक्स के लिए बेकरार रहता था,
दिल खोल बात करना आदत थी मेरी ,
पर में एक सक्स के लिए वफादार रहता था,
पतंगों को उड़ा के सर्त लगाता था,
में ढील दे-दे के इश्क़ आजमाता था,
उस एक इंसान में न जाने क्या-क्या था,
में खुद को भुलाके उसे याद करता था,
हर एक नई लहर मुझे गिराती थी फिर भी में उसको सब सच बताता था,
मुझे मौत लिखने का सोख था और उसे जिंदगी,
 हर एक तस्वीर से नया जीने का सलीका आता था।
मुसाफिरों का काफ़िला जब-जब ठहरता था,
में अपने किस्से सुना के सबको खुश कराता था,
हर दिन-व-दिन मोहब्बत को गाली देता था,
जिस दिन वो सक्स मुझे मुलाकात मैं इंतज़ार कराता था।
लाख दुआ लगती थी मेरी कामयाबी के लिए लेकिन,
उसकी एक दुआ से मेरा दिन बन जाता था,
उसकी जिद थी कि इश्क़ जिस्म से परे हो,
सो में मुलाकात में सिर्फ हाथ मिलाता था,
हम दोनों ही आदत थे एक दूसरे की,
हर शाम हाथ पकड़कर में दरियां को जलाता था,
अकेले होते थे जब-जब हम तेरे अंदाज में दुआ करके आता था,
महीने की पहली तारीख लगते ही तेरे लिए तोहफे लाया करता था,
लोग जलते थे तुझे मेरे साथ देख के,
 में पीर-फ़क़ीर से तेरे नजरें उतरवाता था,
दरियां किनारें बैठे हैं नए मुसाफिरों के तलाश में,
सब भूलने की कोशिश कर रहे हैं बस ये सोच के की वो एक सक्स था,
जो हर दिन नए शहरो में आया-जाया करता था।

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